जंगल के मेले में चोरी — ईमानदारी और मेहनत की कहानी
नीति कथा

जंगल के मेले में चोरी — ईमानदारी और मेहनत की कहानी

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हर साल जंगल के बीचोंबीच सारे जानवर मिलकर “विश्व जंगल दिवस” मनाते थे, और इस मौक़े पर लगता था एक बड़ा मेला। रंग-बिरंगे स्टॉल, लज़ीज़ खाना, झूले और रोमांचक सवारियाँ — दूर-दूर से जानवर इस रौनक़ का हिस्सा बनने आते थे।

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दुकानदारों में सबसे मशहूर था बल्लू भालू — एक अमीर और नेकदिल व्यापारी, जिसकी मिठाई की दुकान मेले की जान थी। उसके शहद-केक और गुड़ की गोलियों के लिए हमेशा लंबी क़तार लगी रहती थी।

“आइए! आइए! पूरे जंगल की सबसे स्वादिष्ट मिठाइयाँ!” बल्लू आवाज़ लगाता, और भीड़ उसकी दुकान पर उमड़ पड़ती।

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थोड़ी दूर खड़े दो शरारती बंदर — जॉली और डॉली — यह सब देख रहे थे।

जॉली ने कहा —
"देख तो ज़रा बल्लू को। थैलियाँ भर-भरकर पैसे कमा रहा है! सारी दौलत उसी के पास क्यों, और हमारे पास कुछ भी नहीं?"

डॉली ने हामी में सिर हिलाया — “इसे तो सबक़ सिखाना पड़ेगा। आज रात इसका सारा पैसा उड़ा लेते हैं!”

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