हरे-भरे बड़े जंगल में साल भर जिस दिन का इंतज़ार रहता था, वह आख़िर आ ही गया — खेल महोत्सव का दिन। दौड़ थी, पेड़ पर चढ़ने का मुक़ाबला था, और सबसे रोमांचक — लुका-छिपी की चैंपियनशिप। इस बार आमने-सामने थीं दो टोलियाँ: “जंगल के राजा” और “जाँबाज़”।
जंगल के राजा टोली में थे — मीको बंदर, पॉली तोता और स्लिंकी साँप। जाँबाज़ टोली में थे — ब्रूनो भालू, कोको कौआ और लिज़ी छिपकली। और निर्णायक बने बुज़ुर्ग हाथी, टस्कर दादा, जिनकी समझदारी पर पूरे जंगल को भरोसा था।
टस्कर दादा ने कहा —
"सब खिलाड़ी पास आ जाओ! पहले टॉस होगा — यह तय करने के लिए कि पहले कौन छिपेगा।"
उन्होंने एक चिकना-सा कंकड़ हवा में उछाला। कंकड़ घूमता हुआ गिरा।
टस्कर दादा ने कहा —
"पहले छिपेंगे जंगल के राजा! जाँबाज़ो, आँखें बंद करके पाँच सौ तक गिनना शुरू करो।"
ब्रूनो, कोको और लिज़ी पेड़ की ओर मुँह करके गिनने लगे — एक… दो… तीन… उधर मीको, पॉली और स्लिंकी सिर जोड़कर सलाह करने लगे।