कबूतरों ने एक-दूसरे की ओर उलझन से देखा। मोमो नाम के एक कबूतर ने पूछा — “काम? भला एक साँप क्या काम कर सकता है?”
साँप ने कहा —
"मैं नीचे ज़मीन से तुम्हारे घोंसलों और अंडों की रखवाली कर सकता हूँ। बदले में तुम मुझे रोज़ थोड़ा-सा दाना दे देना। बस, इतनी-सी बात।"
कबूतर आपस में कानाफूसी करने लगे। “क्या हम इस पर भरोसा कर सकते हैं?” मोमो ने पूछा।
“अब यह पेड़ पर चढ़ ही नहीं सकता,” कोको बोला। “शायद सच कह रहा हो।”
पर टुटू नाम के एक सतर्क कबूतर ने आँखें सिकोड़कर कहा — “हमें कैसे पता चलेगा कि जब कोई देख नहीं रहा होगा, तब तुम हमारे अंडे नहीं खा जाओगे?”
साँप ने उदासी से सिर हिलाया — “अरे नहीं, प्यारे टुटू! मैं तो इतना बूढ़ा और कमज़ोर हूँ कि पेड़ पर चढ़ ही नहीं सकता। मैं ज़मीन पर ही रहकर पहरा दूँगा।”
बहुत बहस के बाद आख़िर कबूतर मान गए।
कोको ने कहा —
"ठीक है। तुम हमारे घोंसलों के पास रह सकते हो। पर अगर हमारे अंडों को कुछ हुआ, तो सबसे पहले हम तुम्हीं पर शक करेंगे!"
साँप चालाकी से मुस्कराया — “मेरा वादा रहा।”
कुछ दिनों तक साँप ने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया। वह ज़मीन से घोंसलों पर नज़र रखता, और कबूतर रोज़ उसे दाना देते रहे।
एक दिन वहाँ से एक दूसरा साँप गुज़रा और उसे देखकर ठिठक गया। “भाई, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” आगंतुक साँप ने पूछा।
बूढ़े साँप ने आह भरी — “इन कबूतरों के घोंसलों की रखवाली कर रहा हूँ, दाने के बदले। अब मुझसे शिकार नहीं होता।”
आगंतुक साँप बुरी तरह हँस पड़ा — “एक ताक़तवर साँप और पक्षियों का नौकर? कितनी शर्म की बात है!”
“कोई चारा नहीं है,” बूढ़ा साँप कड़वाहट से बोला।
“हूँ…” आगंतुक साँप ने जीभ लपलपाई। “मेरे पास इससे अच्छी तरकीब है। अंडों की रखवाली क्यों करते हो, जब उन्हें खा सकते हो? तुम्हें तो पता ही है कि घोंसले कहाँ हैं। मुझे जगह बता दो, मैं ऊपर चढ़कर रोज़ दो अंडे चुरा लाऊँगा — एक तुम्हारे लिए, एक मेरे लिए!”
बूढ़ा साँप हिचकिचाया — “मैंने कबूतरों की रक्षा का वादा किया है।”
आगंतुक साँप ने ताना मारा — “वादों से पेट नहीं भरता। सोच लो।”
बहुत समझाने-बुझाने के बाद बूढ़ा साँप आख़िर लालच में आ गया।
दिन बीतते गए और कबूतरों को कुछ अजीब लगने लगा।
“हमारे अंडे कहाँ जा रहे हैं?” कोको ने चिंता से कहा। “हर घोंसले से अंडे कम हो रहे हैं!”
सारे कबूतर बूढ़े साँप के चारों ओर जमा हो गए।
“तुमने हमारे घोंसलों की रक्षा का वादा किया था!” मोमो रो पड़ा। “हमारे अंडों के साथ हो क्या रहा है?”
साँप ने चेहरे पर दुख का भाव ओढ़ लिया — “अरे मेरे प्यारे दोस्तो, मैंने पिछले दो दिनों से तुम्हारे पेड़ों के आसपास एक चील को मँडराते देखा है। ज़रूर वही तुम्हारे अंडे ले जा रही है।”
कबूतर सन्न रह गए। “चील? अब हम क्या करें?”
“जाओ, उसे ढूँढ़ो,” साँप ने सलाह दी। “और उससे कहो कि यहाँ से चली जाए।”
कबूतरों ने सिर हिलाया और चील की तलाश में उड़ चले। घंटों उड़ने के बाद उन्हें एक पहाड़ी पर बैठी चील दिखाई दी।
कोको ने हिम्मत करके पूछा — “चील जी, क्या आप हमारे अंडे चुरा रही हैं?”
चील हैरान रह गई — “क्या? बिलकुल नहीं! हम पक्षियों का एक उसूल है — हम कभी दूसरे पक्षियों के अंडे नहीं खाते।”
कबूतरों ने राहत की साँस ली — “तो क्या आप हमारी मदद करेंगी? हमें चोर का पता लगाना है।”
चील ने सिर हिलाया — “मैं तुम्हारे घोंसलों के पास पहरा दूँगी और चोर को पकड़कर रहूँगी।”
अगली सुबह चील एक पेड़ पर छिपकर बैठ गई और ध्यान से देखती रही। थोड़ी ही देर में उसने देखा — आगंतुक साँप पेड़ पर चढ़ा, दो अंडे उठाए, नीचे उतरा और उनमें से एक बूढ़े साँप को थमा दिया।
चील उड़ती हुई कबूतरों के पास पहुँची — “मैंने तुम्हारे चोर पकड़ लिए हैं! ये बूढ़ा साँप और इसका साथी हैं।”
कबूतर गुस्से से भर उठे। वे झपटकर नीचे आए और दोनों साँपों को रंगे हाथों धर दबोचा।
“तुमने हमारे साथ विश्वासघात कैसे किया?” मोमो बूढ़े साँप पर चिल्लाया।
चील ने झपट्टा मारा, दोनों साँपों को अपनी मज़बूत चोंच में दबोचा और बोली — “तुमने पक्षियों का उसूल तोड़ा है। अब इसकी क़ीमत चुकाओ।”
पंखों की एक ज़ोरदार फड़फड़ाहट के साथ चील दोनों साँपों को ऊँचे आसमान में ले गई और एक गहरी खाई में गिरा दिया।
कबूतर ख़ुशी से चहक उठे — “धन्यवाद, चील जी! आपने हमारे अंडे बचा लिए।”
“हमेशा एकजुट रहना,” चील ने समझाया। “जब तुम साथ खड़े होते हो, तो कोई भी दुश्मन तुम्हें हरा नहीं सकता।”
✨ सीख ✨
ईमानदारी और भरोसा ही दोस्ती की नींव हैं। भरोसे का ख़ून कभी अच्छा अंजाम नहीं लाता।
✨ सीख ✨
बुरे काम कितनी भी चतुराई से छिपाए जाएँ, एक दिन सामने आ ही जाते हैं।
✨ सीख ✨
एकता में ही बल है। जब हम साथ खड़े होते हैं, तो हर चुनौती को हरा सकते हैं।
🤔
क्या तुम जानते हो?
साँप अपनी जीभ से हवा को सूँघते हैं! और वे सब बुरे नहीं होते — वे खेतों के कीड़ों-चूहों को नियंत्रित करके प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं।
🤔
क्या तुम जानते हो?
कबूतर सदियों से संदेश पहुँचाने के काम आते रहे हैं और रास्ता ढूँढ़ने की उनकी क़ाबिलियत हैरान कर देने वाली है।
💬 आओ, कहानी पर बात करें!
बूढ़ा साँप शिकार क्यों नहीं कर पाता था? खाना पाने के लिए साँप के मन में क्या तरकीब आई? कबूतर साँप की बात मानने को क्यों तैयार हो गए? आगंतुक साँप कौन था और उसने क्या सुझाव दिया? अंडे कम होने पर बूढ़े साँप ने कबूतरों को क्या बहाना बनाया? कबूतरों को असली चोर का पता कैसे चला? चील ने दोनों साँपों के साथ क्या किया? चील ने कबूतरों को क्या सीख दी? इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? कबूतरों के व्यवहार से हम क्या सीख सकते हैं?
करके देखो
✨
कबूतर का घोंसला
काग़ज़, टहनियों या मिट्टी से कबूतर के घोंसले का एक नमूना बनाओ।
✨
भरोसे का बिल्ला
कबूतरों के लिए एक बिल्ला डिज़ाइन करो, जो भरोसे और एकता का प्रतीक हो।
✨
एकता का नाटक
एक छोटा-सा नाटक तैयार करो, जिसमें दिखाओ कि कबूतरों की एकजुटता ने उन्हें साँपों पर जीत कैसे दिलाई।