एक आवारा कुत्ते का सपना
सोते समय की कहानी

एक आवारा कुत्ते का सपना

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हॉर्न बजाती गाड़ियों और आसमान छूती इमारतों वाले एक भागते-दौड़ते शहर में मैक्स नाम का एक आवारा कुत्ता रहता था। भूरे बिखरे बाल, जिज्ञासा से भरी आँखें और एक ऐसी पूँछ, जो मुश्किल दिनों में भी हिलना नहीं भूलती थी। उसके दिन गलियों में घूमते, खाने के टुकड़े सूँघते और भीड़ से बचते हुए बीतते। शहर का चप्पा-चप्पा उसे मुँहज़बानी याद था, और कुछ नेकदिल दुकानदार कभी-कभी उसकी तरफ़ कोई निवाला उछाल देते थे। ज़िंदगी आसान नहीं थी, फिर भी जहाँ मन किया वहाँ चल देने की आज़ादी मैक्स को बहुत भाती थी।

एक आवारा कुत्ते का सपना — चित्र 1

एक धूप वाली दोपहर मैक्स एक नई बस्ती की ओर निकल गया, जहाँ वह पहले कभी नहीं गया था। यहाँ के घर बड़े और सुंदर थे — सजे-सँवरे बग़ीचे और दरवाज़े पर चमचमाती गाड़ियाँ। तभी उसकी नाक में किसी स्वादिष्ट चीज़ की महक पड़ी। महक का पीछा करते-करते वह एक प्यारे-से घर के सामने जा पहुँचा, जिसका दरवाज़ा चटख़ लाल था।

आँगन में एक सुनहरा कुत्ता — रॉकी — एक लड़के के साथ गेंद से खेल रहा था। धूप में उसके बाल सोने जैसे चमक रहे थे और उसकी ख़ुशी से भरी भौंक हवा में गूँज रही थी। झाड़ी की आड़ से मैक्स यह सब देखता रहा, और उसका मन भर आया। रॉकी के पास वह सब कुछ था जिसका मैक्स ने कभी सपना देखा था — गर्म बिस्तर, भरपेट खाना, और एक परिवार जो उसे जान से ज़्यादा चाहता था।

मैक्स ने अपने आप से पूछा — “मेरी ज़िंदगी रॉकी जैसी क्यों नहीं? मुझे ही क्यों ठंडी सड़क पर सोना पड़ता है और खाने के लिए भटकना पड़ता है?”

एक आवारा कुत्ते का सपना — चित्र 2

वह यही सब सोच रहा था कि अचानक उसके सामने एक नरम, चमकती हुई रोशनी फैल गई। रोशनी के बीच से एक नन्ही आकृति निकली — झिलमिलाते पंखों और प्यारी मुस्कान वाली एक जादुई परी।

परी ने कहा —
"नमस्ते, नन्हे आवारा। मैंने तुम्हारे दिल की चाहत देख ली है। मैं तुम्हें एक वरदान दे सकती हूँ। बताओ, तुम्हें इस दुनिया में सबसे ज़्यादा क्या चाहिए?"
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