शहद की चोरी
नीति कथा

शहद की चोरी

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बहुत समय पहले, एक विशाल जंगल के बीचोंबीच भालुओं का एक हँसता-खेलता परिवार रहता था। उसमें थे — माँ भालू, पापा भालू और उनके दो शरारती बच्चे, रोरो और कोको। पूरे परिवार को दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यारा था शहद।

पर उस साल जंगल में आग लग गई थी और ज़्यादातर मधुमक्खियाँ उड़ गई थीं। शहद मिलना मुश्किल हो गया। भालू रोज़ इधर-उधर ढूँढ़ते, पर हर शाम निराश होकर ख़ाली हाथ लौट आते।

शहद की चोरी — चित्र 1

एक धूप वाली दोपहर रोरो और कोको नदी किनारे लुका-छिपी खेल रहे थे।

“दस, नौ, आठ… लो, मैं आ रहा हूँ!” कोको चिल्लाया और अपने भाई को ढूँढ़ने निकल पड़ा।

तभी रोरो को कुछ दिलचस्प दिखाई दिया। “कोको! इधर आ! ज़रा देख तो!” उसने उत्साह से फुसफुसाकर बुलाया।

कोको दौड़कर पहुँचा और जो देखा उससे उसकी आँखें फैल गईं — ग्रिज़ल परिवार के घर के भीतर शहद का एक बड़ा मटका रखा था। खिड़की खुली हुई थी और घर बिलकुल ख़ाली लग रहा था।

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