“वाह! कितना सारा शहद!” कोको के मुँह से निकला।
रोरो शरारत से मुस्कराया — “घर पर कोई नहीं है। चल, उठा लेते हैं!”
कोको के माथे पर बल पड़ गए — “पर यह तो चोरी होगी! हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।”
रोरो ने पंजा हिलाकर बात उड़ा दी — “अरे छोड़ न! सिर्फ़ एक मटका शहद है। किसी को पता भी नहीं चलेगा। ज़रा सोच तो, कितना मज़ा आएगा!”
कोको थोड़ी देर हिचकिचाया, फिर एक लंबी साँस लेकर बोला — “ठीक है… पर सिर्फ़ इस बार।”
दोनों बच्चे खिड़की से भीतर घुसे, सँभालकर मटका उठाया और बाहर ले आए।
“हो गया!” रोरो ख़ुशी से उछला। दोनों एक पेड़ के नीचे बैठकर अपनी मीठी लूट का मज़ा लेने लगे।
वे दोनों चाव से शहद खा ही रहे थे कि तभी वहाँ से लूलू नाम की एक चालाक बिल्ली गुज़री। उसकी तेज़ नज़रों ने यह चोरी की दावत तुरंत ताड़ ली।
“अरे वाह, यह क्या हो रहा है यहाँ?” लूलू म्याऊँ करती हुई पास सरक आई।
रोरो और कोको चौंककर उछल पड़े।
लूलू ने कहा —
"यह शहद तुम्हें कहाँ से मिला?"
“ज… जंगल में पड़ा मिला था,” कोको हकलाया।
लूलू ने सिर हिलाया — “मुझसे झूठ मत बोलो। यह ग्रिज़ल परिवार का शहद है, है न?”
दोनों बच्चों ने घबराकर एक-दूसरे की ओर देखा।
लूलू ने कहा —
"अगर नहीं चाहते कि मैं सबको बता दूँ कि तुमने चोरी की है, तो तुम्हें मेरा एक काम करना होगा।"
“क्या चाहिए तुम्हें?” रोरो ने सँभलकर पूछा।
लूलू की आँखें चमक उठीं — “तुम्हारी माँ की चूड़ियाँ।”
कोको के मुँह से चीख़ निकल गई — “नहीं! वे तो माँ को सबसे प्यारी हैं!”
लूलू ने कहा —
"तो ठीक है, फिर पूरे जंगल को पता चल जाएगा कि तुमने क्या किया।"
पकड़े जाने के डर से दोनों बच्चे मन मारकर मान गए।
उस रात, जब सब गहरी नींद में थे, रोरो और कोको दबे पाँव माँ के कमरे में घुसे।
“सच में हमें यह करना चाहिए?” कोको ने धीरे से पूछा।
“और कोई चारा नहीं है,” रोरो ने जवाब दिया।
उन्होंने चुपचाप अलमारी खोली, चूड़ियाँ निकालीं और घर से बाहर निकल गए। अगली सुबह उन्होंने चूड़ियाँ लूलू को सौंप दीं। लूलू उन्हें पहनकर इतराती हुई पूरे जंगल में घूमने लगी।
कुछ दिन बाद माँ भालू को अपनी चूड़ियाँ ग़ायब मिलीं।
“हाय! मेरी चूड़ियाँ!” वह रो पड़ीं। “वे तो मेरी माँ की निशानी थीं। कहाँ चली गईं?”
रोरो और कोको ने माँ को दुखी देखा, पर चुप रह गए।
इधर जंगल के दूसरे जानवरों की नज़र लूलू की नई चूड़ियों पर पड़ी।
“ये चमकती चूड़ियाँ तुम्हें कहाँ से मिलीं?” एक बंदर ने पूछा।
लूलू मुस्कराई — “बस, एक छोटा-सा तोहफ़ा है।”
पर बंदर को शक हो गया। उसने जाकर पापा भालू को सब बता दिया।
पापा भालू ने बंदर के साथ मिलकर लूलू पर नज़र रखनी शुरू कर दी। एक दिन उन्होंने उसे नदी किनारे चूड़ियाँ दिखाकर इतराते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
“ये तो माँ भालू की चूड़ियाँ हैं!” पापा भालू गरजे। “तुझे कहाँ से मिलीं?”
लूलू घबरा गई — “मु… मुझे आपके बच्चों ने दी थीं। ताकि मैं किसी को न बताऊँ कि उन्होंने शहद चुराया था।”
पापा भालू का गुस्सा सातवें आसमान पर था। घर लौटकर उन्होंने रोरो और कोको को बुलाया।
“क्या यह सच है? तुमने शहद चुराया और माँ की चूड़ियाँ दे दीं?” उन्होंने सख़्ती से पूछा।
दोनों बच्चों ने शर्म से सिर झुका लिया।
“हमें माफ़ कर दीजिए,” कोको ने धीमे से कहा। “हमसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई।”
माँ भालू ने अपने आँसू पोंछे — “ग़लती हर किसी से होती है। पर असली बात यह है कि उसे मानो और सुधारो।”
“हम सब ठीक करेंगे!” रोरो ने वादा किया। “हम ग्रिज़ल परिवार से माफ़ी माँगेंगे।”
अगले दिन दोनों बच्चे ग्रिज़ल परिवार के घर पहुँचे।
“हमें बहुत अफ़सोस है,” उन्होंने कहा। “हमने आपका शहद चुराया था। हमसे ग़लती हुई और हम उसे सुधारना चाहते हैं।”
ग्रिज़ल परिवार ने उन्हें दिल से माफ़ कर दिया। उस दिन रोरो और कोको ने एक बहुत बड़ी सीख पा ली — ईमानदारी ही सबसे अच्छी नीति है।
और लूलू? उसने भी जान लिया कि चालाकी और लालच का अंत कभी अच्छा नहीं होता।
उस दिन के बाद रोरो और कोको ने ईमानदार और नेक बने रहने का वादा किया, और जंगल सबके लिए और भी ख़ुशहाल जगह बन गया।
✨ सीख ✨
ईमानदारी ही सबसे अच्छी नीति है। यह कहानी सिखाती है कि चोरी करना ग़लत है और अपने कामों की ज़िम्मेदारी लेना ज़रूरी है। ग़लतियाँ होती हैं, पर हमें उनसे सीखकर उन्हें सुधारना चाहिए।
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क्या तुम जानते हो?
शहद कभी ख़राब नहीं होता! पुरातत्वविदों को प्राचीन मक़बरों में तीन हज़ार साल से भी ज़्यादा पुराने शहद के मटके मिले हैं, और वह अब भी खाने लायक़ था।
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क्या तुम जानते हो?
बिल्लियाँ अपनी जिज्ञासा के लिए मशहूर हैं, पर लूलू की तरह उन्हें भी ईमानदारी और नेकी सीखने की ज़रूरत होती है।
💬 आओ, कहानी पर बात करें!
भालू परिवार में कौन-कौन थे? उस साल जंगल में शहद मिलना मुश्किल क्यों हो गया था? लुका-छिपी खेलते हुए रोरो और कोको को क्या मिला? शहद का मटका देखकर रोरो ने कोको से क्या कहा? रोरो के सुझाव पर कोको की पहली प्रतिक्रिया क्या थी? शहद खाते हुए भालू के बच्चों को किसने पकड़ा? राज़ छिपाने के बदले बिल्ली ने क्या माँगा? भालू के बच्चों ने चूड़ियाँ कैसे चुराईं? चूड़ियों की चोरी का पता पापा भालू को कैसे चला? कहानी के अंत में भालू के बच्चों ने क्या सीखा?
करके देखो
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जंगल का बैंक
एक ऐसी सुरक्षित जगह का चित्र बनाओ जहाँ जानवर अपना शहद रख सकें। उसमें पहरेदार और चतुर तालों को भी दिखाओ।
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ईमानदारी का पदक
रोरो और कोको को ईमानदारी का सबक़ सीखने पर देने के लिए एक पदक डिज़ाइन करो।
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मधुमक्खी की भूलभुलैया
एक भूलभुलैया बनाओ जिसमें मधुमक्खियाँ रुकावटों से बचती हुई अपने छत्ते तक सुरक्षित पहुँच जाएँ।