बहुत पुरानी बात है। एक घने जंगल में शेर सिंह नाम का शेर राज करता था। उसका जनकल्याण मंत्री था बंदरू — एक चतुर बंदर। जब से बंदरू मंत्री बना था, उसके पाँव ज़मीन पर नहीं पड़ते थे। कोई भी फ़रियादी अपनी परेशानी लेकर आता, तो बंदरू पहले उसे ऊपर से नीचे तक देखता, फिर धीरे से पूछता — “मेरे लिए क्या लाए हो?”
एक दिन शिकार को लेकर एक कुत्ते और एक भेड़िये में झगड़ा हो गया। कुत्ता सीधा मंत्री बंदरू के दरबार पहुँचा।
कुत्ता ने कहा —
"महाराज, यह भेड़िया मेरे इलाक़े में घुसकर शिकार करता है। नियम है कि केवल बूढ़े जानवरों का शिकार होगा, पर यह तो नन्हे बच्चों को भी नहीं छोड़ता। मेरे हिस्से में तो कुछ बचता ही नहीं।"
बंदरू ने बड़े ध्यान से सारी बात सुनी। फिर उसके होंठों पर एक टेढ़ी-सी मुस्कान आ गई।
बंदरू ने कहा —
"तुम्हारी समस्या मैं ज़रूर सुलझा दूँगा… पर बदले में मुझे भी तो कुछ चाहिए।"
कुत्ता ने कहा —
"क्या चाहिए आपको, महाराज?"
